इकाई प्रथम
विकास अर्थ परिभाषा एवं आयाम
1. प्रगति और परिवर्तन में अंतर कीजिये।
प्रगति और परिवर्तन में अंतर:
प्रगति और परिवर्तन दो अलग-अलग लक्ष्यों को संकेत करते हैं। प्रगति एक सकारात्मक शब्द है जो विकास, उन्नति और सुधार को दर्शाता है। यह एक स्थिर, सतत और सक्रिय प्रक्रिया है जो समय के साथ समृद्धि, प्रगति और प्रगामी बदलावों का प्रमाण है। परिवर्तन, दूसरी ओर, विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों, विचारधाराओं और आदतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है। यह संकेत करता है कि सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक या सांस्कृतिक दृष्टिकोण से नए स्थानों, मानदंडों और प्रणालियों का निर्माण हो रहा है। इस प्रकार, प्रगति और परिवर्तन दोनों विकास के महत्वपूर्ण पहलु हैं, लेकिन उनका ध्यान अलग-अलग पहलुओं पर होता है।
2. हैप्पीनैस इंडैक्स क्या है?
हैप्पीनेस इंडेक्स (सुख-भोग सूचकांक): हैप्पीनेस इंडेक्स (भी जाना जाता है के सुख-भोग सूचकांक) एक मापक है जिसका उद्देश्य मानव सुख और कल्याण का मापन करना होता है। यह एक संकेतक है जो जनसंख्या के द्वारा उनकी सामाजिक, आर्थिक और मानसिक विकास की स्थिति को मापने में मदद करता है। हैप्पीनेस इंडेक्स अक्सर सामग्रीतात्मक और अधिकतात्मक मानदंडों के आधार पर निर्धारित होता है, जिसमें समाजिक संपर्क, आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक स्थिरता और व्यक्तिगत संतुष्टि जैसे पारंपरिक और अधिकृत आंकड़े शामिल हो सकते हैं।
3. मानव विकास सूचकांक क्या है?
मानव विकास सूचकांक (Human Development Index या HDI) एक मापक है जिसका उद्देश्य देशों के व्यक्तियों की जीवनायाम को मापने में मदद करना है। यह मानवीय प्रगति को मापने के लिए उपयोगी है और आधारभूत सामाजिक प्रगति के मापदंडों में संक्रियामान है। HDI में मुख्य तत्व शिक्षा, जीवनकाल और वाणिज्यिक सक्षमता को मापने के लिए शामिल होते हैं। इस मापक का उपयोग करके, विभिन्न देशों के मानवीय विकास के मद्देनजर, नीतियों और प्रोग्रामों का निर्माण किया जा सकता है।
4. शिशु मृत्यु दर क्या है?
शिशु मृत्यु दर उन नवजात शिशुओं की संख्या को प्रतिशत में दर्शाता है जो प्रति हजार जन्म पर मर जाते हैं। यह एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापक है और किसी देश या क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं, जनसंख्या के पहुंच और स्वास्थ्य स्तर का मापन करने में मदद करता है। शिशु मृत्यु दर की कमी को एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा और अच्छे जीवनायाम का प्रमाण माना जाता है।
5. सकल घरेलू उत्पाद किसे कहते हैं?
सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product या GDP) एक आर्थिक मापक है जो किसी देश या क्षेत्र में एक निर्धारित समयावधि में उत्पन्न होने वाले सभी वस्त्र, सेवाएं और उत्पादों की मात्रा को मापता है। GDP माध्यम से देश की आर्थिक गतिशीलता, विकास और आर्थिक आपूर्ति का मापन किया जाता है। यह व्यक्तियों और देश के बीच आर्थिक तुलनात्मक विश्लेषण में मदद करता है और राष्ट्रीय आर्थिक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
6. राष्ट्रीय आय से क्या समझते हैं?
राष्ट्रीय आय एक आर्थिक मापक है जो देश के नागरिकों की कुल आय को मापता है। यह विभिन्न स्रोतों से आय प्राप्ति को शामिल करता है, जिनमें सम्मान और कार्यक्षेत्र में कमाई, सरकारी योगदान, साझेदारी योगदान, और वित्तीय संपत्ति की आय शामिल हो सकती है। राष्ट्रीय आय का मापन एक देश की आर्थिक स्थिति को मापने और तुलनात्मक विश्लेषण करने में मदद करता है। इसे उपयोग करके राष्ट्रीय आर्थिक नीति बनाई जाती है और आर्थिक विकास के साथ-साथ आमजन की आर्थिक आपूर्ति और उच्चतम स्तर के जीवनायाम की सुनिश्चितता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
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इकाई द्वितीय
सामाजिक सातत्यता की अवधारणा एवं सतत विकास लक्ष्यों में सामाजिक सातत्यता
1. जी.ई.आर. क्या है?
जीईआर- सकल नामांकन अनुपात शिक्षा क्षेत्र में उपयोग किया जाने वाला एक सांख्यिकीय उपाय है, छात्रों की संख्या के अनुपात को दिखाने के लिए किया जाता है जो विशेष ग्रेड स्तर के लिए अर्हता प्राप्त करते हैं।
2. सी.एम. हेल्प लाईन क्या है?
सीएम हेल्पलाइन (Chief Minister's Help Line) एक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य नागरिकों को सीएम कार्यालय द्वारा सीधा संपर्क सुविधा प्रदान करना है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिक अपनी समस्याओं, सुझावों या शिकायतों को सीएम कार्यालय तक पहुंचा सकते हैं। यह उन्हें सरकारी योजनाओं, सेवाओं और उपयोगी जानकारी के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करने में मदद करता है। सीएम हेल्पलाइन नागरिकों के लिए एक सरकारी सम्पर्क सुविधा का महत्वपूर्ण स्रोत है और सुविधाजनक और सुरक्षित तरीके से शिकायतों या समस्याओं का समाधान प्रदान करता है।
3. गैर संचारी रोग किन्हें कहते हैं?
गैर संचारी रोग वे रोग हैं जो व्यक्ति से व्यक्ति के माध्यम से नहीं फैलते हैं। इनमें संक्रमण के साधारण माध्यम जैसे संपर्क, हवा, खाद्य पदार्थों, पानी, या सामान्य वातावरण से इंफेक्शन के माध्यम से होने की कमी होती है। कुछ गैर संचारी रोग उदाहरण रूप में कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, यौन रोग, बहुमुखी रोग, अलर्जी, और ऑटोइम्यून रोग शामिल हो सकते हैं। इन रोगों का प्रसार ज्यादातर व्यक्ति के आंतरिक कारणों या अनुषंगिक प्रतिक्रियाओं के कारण होता है।
4. कुपोषण से क्या समझते हैं?
कुपोषण एक ऐसी स्थिति है जब शरीर को पूर्णता से पोषण नहीं मिल पाता है और इसके परिणामस्वरूप शारीरिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह खाद्य सामग्री में अपूर्णता, खाने के संगठन में अशक्ति, विषमता या खाद्य संक्रमण के कारण हो सकता है। कुपोषण का प्रमुख कारक पोषणात्मक आवश्यकताओं की कमी होती है जैसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स आदि। यह बच्चों और प्रासंगिक परिवारों के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है और उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
5. पी.डी.एस. क्या है?
पीडीएस (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट) एक आर्थिक माप है जो देश के सभी घरेलू उत्पादों की मानव सेवा की मात्रा को मापता है। इसमें उत्पादन, विपणन, सेवाओं, निवेश, और बाह्य दुसर्कर्मियों के संचालन के आधार पर देश के आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन किया जाता है। पीडीएस आर्थिक विकास और आय विभाजन के मापदंड के रूप में उपयोगी होता है और एक देश के आर्थिक स्थिति को मापने में मदद करता है।
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इकाई तृतीय
आर्थिक सातत्यता
1. प्रति व्यक्ति आय से क्या समझते हैं?
प्रति व्यक्ति आय से हम व्यक्ति को मिलने वाली आय का मापन करते हैं। यह आय की मात्रा होती है जो व्यक्ति द्वारा उत्पन्न की गई होती है या जिसे व्यक्ति अपनी सेवाओं के बदले प्राप्त करता है। प्रति व्यक्ति आय समाजिक और आर्थिक अधिकारों, समानता और आय विभाजन की मापदंडों का महत्वपूर्ण स्रोत है।
2. विकास दर से क्य आशय है?
विकास दर से हम एक देश की आर्थिक प्रगति की गति को समझते हैं। यह विकास के साथ उत्पन्न होने वाले आर्थिक परिवर्तन की मात्रा होती है। विकास दर द्वारा हम जान सकते हैं कि एक देश की आर्थिक गति कितनी तेजी से बदल रही है और क्या उसे अपने लक्ष्यों तक पहुंचाने के लिए प्रगति हो रही है या नहीं।
3. छद्म बेरेाजगारी क्या है?
छद्म बेरोजगारी संकेतक रूप से उपयोग होती है और यह उन लोगों को संदर्भित करती है जो कार्य सूचना नहीं देते हैं, लेकिन वास्तविकता में बेरोजगार हो सकते हैं। यह अक्सर गणना से छिपी होती है और ऐसे लोगों को शामिल करती है जो नौकरी तलाश रहे हैं, लेकिन नियंत्रण तालाबंदी या उपलब्धता की कमी के कारण आधिकारिक रूप से बेरोजगार नहीं गिने जाते हैं।
प्रच्छन्न बेरोजगारी उस बेरोजगारी को कहते हैं जिसमे कुछ लोगों की उत्पादकता शून्य होती है अर्थात यदि इन लोगों को उस काम में से हटा भी लिया जाये तो भी उत्पादन में कोई अंतर नही आएगा. जैसे यदि किसी फैक्ट्री में 100 जूतों का निर्माण 10 लोग कर रहे हैं और यदि इसमें से 3 लोग बाहर निकाल दिए जाएँ तो भी 100 जूतों का निर्माण हो जाये तो इन हटाये गए 3 लोगों को प्रच्छन्न रूप से बेरोजगार कहा जायेगा. भारत की कृषि में इस प्रकार की बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है.
4. पीपीटी माॅडल किसे कहते हैं?
पीपीटी मॉडल (प्रशासनिक व्यय परिकल्पना और प्रबंधन मॉडल) एक प्रबंधन और नियोजन का मॉडल है जो सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रबंधन और व्ययों के लिए उपयोग होता है। यह मॉडल सरकारी संस्थाओं को प्रशासनिक निर्धारण, संसाधन विभाजन, बजट योजना, लक्ष्य निर्धारण और कार्य क्रम निर्माण में मदद करता है। इसका उपयोग सरकारी संगठनों के अधिकारियों द्वारा प्रभावी प्रबंधन के लिए किया जाता है।
5. महगाई दर को स्पष्ट कीजिये
महँगाई दर एक माप या मानक है जिससे हम वस्त्र, खाद्य पदार्थ, आवास, और अन्य सामग्री की मूल्यांकन और महँगाई के स्तर को मापते हैं। यह उपभोक्ता मूल्य सूचक है जिससे हम वस्त्रादि सामग्री की कीमतों की वृद्धि को मापते हैं और दायरे में वृद्धि के कारणों का आकलन करते हैं। महँगाई दर को विभिन्न माध्यमों से निर्धारित किया जाता है, जैसे कि महँगाई सूचक, उपभोक्ता मूल्य सूचक आदि। इसका उपयोग अर्थशास्त्र, नीति निर्माण, व्यापार और वित्तीय योजनाओं में किया जाता है।
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इकाई चतुर्थ
पर्यावरणीय सातत्यता
1. स्वच्छता सर्वेक्षण क्या है?
स्वच्छता सर्वेक्षण एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें एक क्षेत्र की स्वच्छता स्तर की मापनिकी तैयार की जाती है। इसमें सामग्री या सांकेतिक चिह्नों के माध्यम से विभिन्न स्वच्छता पैरामीटर्स की जांच की जाती है, जैसे कि साफ-सफाई, स्वच्छ पानी, शौचालय सुविधा, कचरा प्रबंधन, वायु प्रदूषण, सामुदायिक स्वच्छता आदि। यह सर्वेक्षण स्वच्छता के स्तर को मापता है और स्वच्छता नीतियों और कार्यान्वयन की प्रभावीता को मूल्यांकन करने में मदद करता है।
2. कार्बन उत्सर्जन से क्या समझते हैं?
कार्बन उत्सर्जन से हम विभिन्न गतिविधियों द्वारा वायुमंडल में कार्बन धारित गैसों के उत्सर्जन को समझते हैं। इसमें प्रमुख धातुओं जैसे कि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और मेथेन (CH4) के उत्सर्जन को शामिल किया जाता है। ये उत्सर्जन जल, वनस्पति, पेट्रोलियम उत्पादों के इस्तेमाल, इंडस्ट्रीय कारख़ानों, परिवहन के इस्तेमाल, विद्युत उत्पादन आदि से हो सकते हैं। कार्बन उत्सर्जन महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका प्रभाव भूमिगत गर्मी और जलवायु पर पड़ता है, जो पर्यावरण और मानवीय स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
3. वाटर हारवेस्टिंग क्या है?
वाटर हार्वेस्टिंग एक तकनीक है जिसमें वर्षा पानी को इकट्ठा करने और संग्रहित करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह तकनीक प्राकृतिक स्रोतों के जल स्तर को पुनर्स्थापित करने और जल संसाधनों को सुरक्षित करने में मदद करती है। इसमें वर्षा पानी को छत्तों, टैंकों, तालाबों, खाईयों, और अन्य संरचनाओं में इकट्ठा किया जाता है ताकि इसे बाद में सिंचाई, पेयजल, और अन्य उपयोगों के लिए उपयोग किया जा सके। वाटर हार्वेस्टिंग जल संसाधनों की बचत और प्रबंधन में मदद करती है, खासकर जिन क्षेत्रों में जल संसाधन अल्प होते हैं।
4. वाटरशेड को स्पष्ट कीजिये।
वाटरशेड एक ऐसा क्षेत्र होता है जिसमें सभी जल स्रोतों का संग्रह होता है, जैसे झीलें, नदियाँ, बांध, छोटे नालों के स्रोत, और बारिश के पानी का संकलन। वाटरशेड अपने आसपास के क्षेत्र में जल संसाधन के प्रबंधन को संरचित करने में मदद करता है। इसका उद्देश्य जल संसाधनों की संरक्षण, जल उपयोग का नियंत्रण, जल संरचनाओं का निर्माण और जल संकलन के माध्यम से जलसंचय करना होता है। वाटरशेड के माध्यम से, जल संसाधनों की अच्छी प्रबंधन प्रथाओं को स्थापित किया जाता है जो स्थानीय सामुदायिक विकास, जल सुरक्षा, और जल संरक्षण को संभव बनाते हैं।
5. जैव विविधता को समझाइये।
जैव विविधता संपूर्ण पृथ्वी पर मौजूद जीव जंतुओं, पौधों, माइक्रोऑर्गेनिज्मों और अन्य जीवीय विकास की विविधता है। यह विविधता जीवाश्म और जीवाश्म नहीं होती है, बल्कि जीवों की प्रकृतिक विभिन्नता और उनके अंतरजातीय रिश्तों के आधार पर होती है। जैव विविधता आपातकालीन सेवा, वनस्पति उत्पादकता, प्राकृतिक संतुलन, पोलिनेशन, जल संरचना आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके साथ-साथ, जैव विविधता भोजन, औषधीय उत्पादों, जलवायु नियंत्रण, और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण भी है।
6. प्राकृतिक संसाधन किन्हें कहते हैं?
प्राकृतिक संसाधन उन संसाधनों को संदर्भित करता है जो प्रकृति द्वारा प्रदान किए जाते हैं और मानव समुदायों को सुख और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं। इन संसाधनों में जल, वनस्पति, वन, खनिज, जीव-जंतु जैवविविधता, जलवायु, मृदा, वायु, और सौर ऊर्जा शामिल होते हैं। ये संसाधन प्रकृति से प्राप्त होते हैं और मानवीय उपयोग के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। मानव समुदाय इन संसाधनों को संरक्षित रखने, प्रबंधित करने और संचालित करने के लिए उचित देखभाल करते हैं ताकि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध रह सकें।
7. प्राकृतिक आपदाओं को समझाइये।
प्राकृतिक आपदाएं वे तापमानिक, जलमानसिक, जनसंख्या, भूमि और जल संसाधनों, वन्यजीवों, और जीवाश्मों में ऐसी परिस्थितियाँ हैं जो असाधारण होती हैं और मानवीय जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। इनमें भूकंप, बाढ़, तूफ़ान, भूस्खलन, सूखा, ज्वालामुखी प्रकोप, जलवायु परिवर्तन, और जलप्रदूषण शामिल हो सकते हैं। ये आपदाएं मानव समुदायों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और उनकी जीवनी गतिविधियों, आर्थिक प्रगति, स्वास्थ्य, और पर्यावरणीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। इन आपदाओं के प्रबंधन में उचित सक्रियता, प्रतिसाधारण क्षमता, और संयम की आवश्यकता होती है ताकि लोग सुरक्षित रह सकें और प्राकृतिक संसाधनों की संरक्षा कर सकें।
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इकाई पंचम
लक्ष्यों हेतु साझेदारी (लक्ष्य-17)
1. मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद क्या है?
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद (Madhya Pradesh Jan Abhiyan Parishad) एक स्वतंत्र निकाय है जो मध्य प्रदेश राज्य सरकार के अधीन स्थापित किया गया है। यह परिषद समाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की निगरानी और संचालन का कार्य करती है। इसका उद्देश्य गरीबी और अशिक्षा को कम करना, स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंच को बढ़ाना, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना, और लोगों को आर्थिक विकास के लिए सशक्त बनाना है।
2. योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के क्रियाकलापों को स्पष्ट कीजिये।
योजना, आर्थिक और सांख्यिकी विभाग सरकारी निकाय होता है जो योजनाओं की तैयारी, निर्माण, प्रगति का मूल्यांकन, और राज्य के विकास के लिए आर्थिक और सांख्यिकी डेटा के संग्रह, प्रबंधन और विश्लेषण का कार्य करता है। इस विभाग का कार्य नई योजनाओं की तैयारी, पूर्णांकन, और मान्यता प्राप्त करना, योजनाओं के लिए आर्थिक संसाधनों का विनियमन, प्रबंधन और वित्तीय संसाधनों का उपयोग करके योजनाओं का क्रियान्वयन करना, और योजनाओं के प्रगति का निरीक्षण और मूल्यांकन करना होता है। सांख्यिकी विभाग डेटा के संग्रह और विश्लेषण के माध्यम से नीतिगत निर्णय लेने में मदद करता है।
3. जनभागीदारी से क्या समझते हैं?
जनभागीदारी से सामाजिक और आर्थिक विकास की दृष्टि से एक योजनाकर्ता और निर्माता के रूप में लोगों को सहभागी बनाने का मतलब होता है। जनभागीदारी के माध्यम से, सरकार और सामाजिक संगठन लोगों के साथ मिलकर नीतियों और योजनाओं को तैयार करते हैं, कार्यान्वित करते हैं और मान्यता प्राप्त करते हैं। जनभागीदारी लोगों को सशक्त बनाने, उनकी सामरिकता को बढ़ाने, उनकी मतदान क्षमता को बढ़ाने, और समुदाय के विकास में उनकी सहभागिता को सुनिश्चित करने का माध्यम भी है।
4. समावेशी विकास क्या है?
समावेशी विकास एक विकास की दृष्टि है जिसमें ध्यान से सभी समुदायों की सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को
पूरा करने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य समग्र विकास, सामरिक समावेश, और समान अवसरों की सृजनात्मकता को सुनिश्चित करना होता है। समावेशी विकास में सभी समुदायों के विकास के लिए न्याय, समानता, और समरसता का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
5. वंचित वर्गों से क्या आशय है?
वंचित वर्गों का अर्थ होता है वह भाग जो समाज में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ गया हो और जिसे आवश्यक सेवाओं, सुरक्षा और विकास की आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। वंचित वर्ग आम तौर पर गरीबी, असंगठित क्षेत्रों के लोगों, सामाजिक जातियों, आदिवासी जनजातियों, महिलाओं, बालिकाओं, दिव्यांग लोगों, और अन्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को संकेत करता है।
6. सार्वजनिक वित्त क्या है?
सार्वजनिक वित्त सरकार द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित किया जाने वाला वित्त है। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना होता है। सार्वजनिक वित्त के माध्यम से सरकार विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करती है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, औद्योगिक विकास आदि। इसे सरकारी बजट, कर, ऋण और अन्य वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। सार्वजनिक वित्त महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, और व्यापार निवेश को समर्थन करने में मदद करता है।
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