इकाई प्रथम
सामाजिक सातत्यता की अवधारणा एवं सतत विकास लक्ष्यों में सामाजिक सातत्यता
1. सतत कृषि से क्या समझते है?
11. सतत कृषि, विस्तार और प्रौद्योगिकी योजनाएँ:देश के चिन्हित जिलों में स्थायी रूप से क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से चावल, गेहूं, दालों और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने, व्यक्तिगत खेत स्तर पर मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता को बहाल करने और किसानों के बीच विश्वास को बहाल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण राज्य और केन्द्र प्रायोजित योजनायें निम्नाकित हैं-
1.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाय),
2.राज्य सूक्ष्म सिंचाई मिशन
3.मुख्यमंत्री खेत तीर्थ योजना
4.प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
5.परंपरागत कृषि विकास योजना
6.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
7.राष्ट्रीय कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी मिशन (एनएमएईटी)
8.तेल बीज एवं तेल ताड़ राष्ट्रीय मिषन (एनएमओओपी)
सतत कृषि एक कृषि प्रणाली है जिसका मुख्य उद्देश्य भूमि, पानी, और पर्यावरण के संसाधनों का सही उपयोग करके दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करना होता है। यह प्रणाली खेती, पशुपालन, मत्स्यपालन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अपनाई जाती है।
सतत कृषि के मूल तत्व शामिल हो सकते हैं:
1. पोषण के लिए जल्दबाजी रोपण के बजाय धीरे-धीरे बागवानी की प्रक्रिया का पालन करना।
2. उपयुक्त खाद, जैविक खाद और सुगंधित खाद का उपयोग करना।
3. कीटनाशकों और कीट प्रबंधन के स्थान पर प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग करना।
4. बायो-डाइवर्सिटी को संजोए रखना और प्राकृतिक पर्यावरणीय संसाधनों का सुरक्षित रखना।
5. जल संसाधनों का सही उपयोग करना, सिंचाई प्रणालियों का उपयोग करके पानी की बचत करना।
6. अवशेषों का उपयोग करना, जैसे कि पशुओं के गोबर का उपयोग करके खेती में खाद का निर्माण करना।
7. प्रणाली उत्पादन के माध्यम से बिजली और ऊर्जा की बचत करना।
8. गर्भपाती पशुओं का संचालन करना और पशुओं के स्वास्थ्य का संरक्षण करना।
सतत कृषि में लक्षित किया जाता है कि विशेष ध्यान देकर उत्पादन कार्यक्रम को स्थायीत्वपूर्ण बनाया जाए ताकि संसाधनों का उचित उपयोग किया जा सके और भविष्य में उत्पादन वृद्धि के लिए नकारात्मक प्रभाव कम हो। इससे सतत कृषि पर्यावरणीय सुस्थिति को सुनिश्चित करने, जल संसाधनों की सुरक्षा करने, बायोडाइवर्सिटी की रक्षा करने और कृषि उत्पादों के गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
2. खाद्य सुरक्षा का क्या आशय है?
खाद्य सुरक्षा का आशय है ऐसी स्थिति जहां सभी लोगों को स्वस्थ्य, पोषणपूर्ण और पर्याप्त खाद्यान्न की उपलब्धता और पहुंच होती है। खाद्य सुरक्षा के माध्यम से समाज में भूखमरी और पोषणहीनता को दूर किया जाता है और सभी लोगों को स्वस्थ्य और उचित मात्रा में पोषणपूर्ण आहार प्राप्त होता है।
खाद्य सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य है सुरक्षित, उपयुक्त और वाणिज्यिक खाद्य उत्पादन के माध्यम से लोगों के खाद्यान्न की आवश्यकताओं को पूरा करना। इसके लिए कृषि उत्पादन, प्रबंधन, वितरण, खाद्य सुरक्षा कानूनों का निर्माण और कार्यान्वयन, खाद्य संरक्षण, अनुसंधान और तकनीकी उन्नयन जैसे कई क्षेत्रों पर कार्य किया जाता है। खाद्य सुरक्षा नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की खाद्यान्न की आवश्यकताओं का पूरा होना सुनिश्चित किया जाता है।
5. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन: देश के चिन्हित जिलों में स्थायी रूप से क्षेत्र विस्तार और चावल, गेहूं, दालों और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 2007-08 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत खेत स्तर पर मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता को बहाल करना तथा किसानों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए कृषि स्तर की अर्थव्यवस्था (यानी कृषि लाभ) को बढ़ाना है। मध्यप्रदेश शासन भी मिशन की मूल रणनीति के अनुरूप किसानों की क्षमता निर्माण के साथ-साथ उन्नत प्रौद्योगिकियों, अर्थात बीज, सूक्ष्म पोषक तत्व, मृदा संरक्षण, एकीकृत कीट प्रबंधन, कृषि मशीनरी और औजार, सिंचाई उपकरणों के संसाधन संरक्षण को बढ़ावा दे रही है।
6. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए):मध्यप्रदेश सरकार का खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग एनएफएसए-2013 के प्रावधानों के कार्यान्वयन में अग्रणी रहा है। एनएफएसए अधिनियम के तहत परिकल्पित सुधार के तहत:सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उपकरण का प्रयोग” उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) का आॅटोमेषन केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता के साथ शुरू किया गया था। एफपीएस ऑटोमेशन का लक्ष्य लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) को अधिक कुशल, प्रभावी और पारदर्शी बनाना और सिस्टम में बढ़ती जवाबदेही लाना है।
3. जीवन प्रत्याक्षा सूचकांक क्या है?
जीवन प्रत्याक्षा सूचकांक (Life Expectancy Index) एक महत्वपूर्ण सामाजिक सूचकांक है जो किसी देश या क्षेत्र में जनसंख्या की औसत उम्र को प्रदर्शित करता है। इस सूचकांक का मापन मुख्य रूप से जीवनकाल (लंबाई) के माध्यम से किया जाता है। जीवन प्रत्याक्षा सूचकांक द्वारा संकेतित किया जाता है कि वहां की जनसंख्या के अद्यतनित रूप से जीवित रहने की औसत उम्र क्या है।
जीवन प्रत्याक्षा सूचकांक मुख्य रूप से जनसंख्या के स्वास्थ्य और पोषण स्तर का प्रतिबिंब दर्शाता है। यह देश या क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण की सुविधाओं, शिक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा और अन्य प्राथमिक आवश्यकताओं के स्तर का मापन करने में मदद करता है। जीवन प्रत्याक्षा सूचकांक की बढ़ती हुई मान्यता एक समृद्ध और स्वस्थ समाज के लक्षण के रूप में भी मानी जाती है।
यह सूचकांक देशों या क्षेत्रों के बीच तुलना करने, विकास की प्रगति को मापने और समाजिक नीतियों का निर्माण करने में भी उपयोगी होता है। इसके माध्यम से सरकारें और संगठनों को आवश्यक कदम उठाने और उनकी प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करने का अवसर मिलता है।
4. आयुष्मान योजना को स्पष्ट कीजिये।
आयुष्मान योजना, जिसे पूरा नाम प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana) है, एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है जिसका उद्देश्य गरीब और निचले आय वर्ग के लोगों को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। यह भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही है और 23 सितंबर 2018 को शुरू हुई थी।
आयुष्मान योजना के तहत, पात्र गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा कार्ड (Social Security Card) द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलता है। यह योजना अस्पतालीय और चिकित्सा सेवाओं के लिए बीमा योजना प्रदान करती है, जिसमें निर्धारित बजट में उपचार का वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
आयुष्मान योजना के तहत, लाभार्थी एक व्यक्तिगत पहचान पत्र (आधार कार्ड) के साथ चिकित्सा विभाग के निर्धारित अस्पतालों में उपचार प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं को कवर करती है, जिनमें सर्जरी, रोगों का इलाज, गर्भावस्था संबंधित सेवाएं, बाल चिकित्सा, नवजात शिशु की देखभाल, कैंसर के इलाज, दिमागी रोगों का इलाज, किडनी रोगों का इलाज और अन्य चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं।
आयुष्मान योजना के अंतर्गत लाभार्थी व्यक्ति की आय के आधार पर चयनित होते हैं और उन्हें पहले से ही वार्ड निर्धारित किया जाता है। यह योजना भारत के गरीब और निचले आय वर्ग के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के एक महत्वपूर्ण संकल्प का हिस्सा है।
5. ड्राॅप आउट से क्या आशय है?
ड्रॉपआउट (Dropout) शिक्षा क्षेत्र में एक शब्द है जिसका अर्थ होता है विद्यालय या स्कूल में पठन अध्ययन करते दौरान छात्र या छात्राओं की शैक्षिक पाठशाला से प्रायः बिचड़ जाना या पढ़ाई छोड़ देना। इसे अनियमित उपस्थिति, स्कूल से छुट्टी लेने, आराम करने, मज़बूती के अभाव, परिवारी समस्याएं, आर्थिक कठिनाइयां, शैक्षणिक निराशा, या अन्य कारणों के कारण हो सकता है।
ड्रॉपआउट आमतौर पर शिक्षा प्राप्त करने की प्रक्रिया के मध्य में ब्रेक या अवरोध का कारण बनता है और इसके परिणामस्वरूप छात्र शिक्षा का अवसर खो देते हैं और उन्हें आगे की शैक्षिक पढ़ाई और सामाजिक विकास का लाभ नहीं मिलता है। ड्रॉपआउट के कारण, छात्रों की पढ़ाई, उनकी करियर और जीवन की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए, शिक्षा निरंतरता, स्थिरता और छात्रों के अवसरों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण ध्यान रखना आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) एक आंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, सहयोगी विकास, मानवाधिकारों की संरक्षा, और विश्व स्तर पर सामरिक समस्याओं का समाधान करना है। यह 1945 में स्थापित किया गया था और वर्तमान में उसमें 193 सदस्य देश शामिल हैं।
Comments
Post a Comment