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सामाजिक सामूहिक कार्य : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 इकाई प्रथम परिचय मूल्य एवं सिद्धांत           1. भारत में सामूहिक का इतिहास लिखें। भारत में सामूहिकता की भावना और उसका इतिहास बहुत प्राचीन हैं। इस देश में बड़ी-बड़ी सामुदायिक गतिविधियाँ और एकजुटता के उदाहरण मिलते हैं जो सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक या राजनीतिक मायनों में व्यापक प्रभाव डालती हैं। इसका इतिहास भारतीय सभ्यता, सामाजिक संस्कृति और राष्ट्रीय आंदोलनों के साथ जुड़ा हुआ है। प्राचीनकाल में भारतीय समाज गांव और जाति के प्रमुख आधार पर संगठित था। लोग जाति, वंश, या धर्म के आधार पर एकत्र होते थे और उनकी संघटना व्यापक सामुदायिक जीवन पर आधारित थी। इस प्रकार की सामूहिकता को समुदाय (community) कहा जाता था। इन समुदायों के भीतर धार्मिक और सांस्कृतिक समानताएं, संस्कार, और साझा मूल्यों को बनाए रखने की प्रथा थी। उदाहरण के रूप में, विभिन्न जातियों और समुदायों में मातृभाषा, खाद्य, वेशभूषा, और साहित्यिक परंपराएं आदि अपनी अलग-अलग थीं, लेकिन उनके बीच भी कुछ सामान्यताएं मौजूद थीं जो समाज को एकजुट करती थीं। आधुनिक भारतीय इतिहास में, सामूहिकता की भावना और आंदोलन विशेष रूप...

सामाजिक सामूहिक कार्य : लघु उत्तरीय प्रश्न

    इकाई प्रथम परिचय मूल्य एवं सिद्धांत     1. समूह कार्य के कौशल को लिखें। समूह कार्य के कौशल: निपुणता एवं कौशलता व्यवसाय की दृष्टि से अंतत्य महत्वपूर्ण गुण है। समान्यभाषा में इसके अर्थ को कार्य करने की क्षमता के रूप मे जाना जाता है। समूह कार्य प्रक्रिया में यह परम् आवश्यक होता है कि प्रत्येक कार्यकर्ता इस प्रकार की कुशलताओं से युक्त हो ट्रेकर ने कुशलता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि कार्यकर्ता की विशेष परिस्थितियों में ज्ञान एवं समय के उपयोग की क्षमता हैं। संचार दक्षता (Communication Skill):- समूह कार्यकर्ता, सेवाओं को, कार्यक्रम के माध्यम से, संचार दक्षता के आधार पर सफलतापूर्वक पूर्ण करता है। सामान्यतः संचार शब्द का अर्थ किसी एक विचारों,तथ्यों, संबंधों और भावनाओं को दूसरे तक पहुचाने की क्षमता से लगाया जाता है।  रॉबिन्स के अनुसार समूह में संचार के चार आवश्यक अंग होते हैः- नियंत्रण, प्रेरणा, भावनात्मक अभिव्यक्ति और सूचना ।  सुनने की दक्षता(Listening Skill) :- सुनना एक महत्वपूर्ण दक्षता है, जोकि सभी व्यक्ति के अन्दर विद्यमान होता है। सिवाय दिव्या...