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महिला एवं बाल विकास : बाल सुरक्षा प्रावधान और चुनौतियां : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Objective type questions)

                                                    UNIT - 1

  1. संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति बालक है।
  2. बाल सुरक्षा एक अधिकार आधारित समझ है।

  3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ सर्वेक्षण-5 के अनुसार 0 से 6 वर्ष में लिंगानुपात 837 है।

  4. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ सर्वेक्षण-5 के अनुसार 20-24 आयु वर्ग की 23.3% महिलाओं ने माना कि उनकी शादी 18 वर्ष से पूर्व हो गई थी।

  5. भारत में शिशु मृत्यु दर 35 प्रति 1000 जीवित जन्म है।


  1. बालक किसे कहते हैं?

    • बालक वह व्यक्ति होता है जिसकी आयु 18 वर्ष से कम होती है। यह परिभाषा संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (UNCRC) के अनुसार निर्धारित की गई है।
  2. बाल सुरक्षा से आप क्या समझते हैं?

    • बाल सुरक्षा का अर्थ है बच्चों को हिंसा, शोषण, दुरुपयोग, उपेक्षा और अन्य खतरों से बचाना और उन्हें एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण प्रदान करना जिसमें वे अपने सभी अधिकारों का आनंद ले सकें और उनका समुचित विकास हो सके।
  3. यूएनसीआरसी के अनुसार बाल सुरक्षा क्या है?

    • यूएनसीआरसी (UNCRC) के अनुसार, बाल सुरक्षा का अर्थ है बच्चों को सभी प्रकार के शोषण, हिंसा, उपेक्षा और दुर्व्यवहार से बचाना और उन्हें एक सुरक्षित और सुरक्षित वातावरण में बढ़ने के अवसर प्रदान करना। यह बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक उपायों को शामिल करता है।
  4. भारत की जनसंख्या के कितने प्रतिशत बच्चे असुरक्षित हैं?

    • विभिन्न रिपोर्टों और अध्ययनों के अनुसार, भारत में लगभग 40% बच्चे असुरक्षित माने जाते हैं। यह आंकड़ा बच्चों के शोषण, उपेक्षा, बाल श्रम, और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार के मामलों पर आधारित है।
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UNIT - 2

  1. यूएनसीआरसी (UNCRC) के अनुसार बाल अधिकारों को चार भागों में बांटा जा सकता है।

    • उत्तरजीविता अधिकार (Right to Survival)
    • विकास अधिकार (Right to Development)
    • संरक्षण अधिकार (Right to Protection)
    • सहभागिता अधिकार (Right to Participation)
  2. जन्म पंजीयन का अधिकार उत्तरजीविता अधिकार (Right to Survival) के अंतर्गत आता है।

  3. बाल श्रम से सुरक्षा संरक्षण अधिकार (Right to Protection) है।

  4. यूनिसेफ (UNICEF) की स्थापना सन 1946 में हुई।

  5. यूनिसेफ का लक्ष्य बच्चों के अधिकारों का संरक्षण करना है।

  6. आईसीडीसी (ICDC) का मुख्यालय फ्लोरेंस, इटली में है।

  7. सी आर आई का फुल फॉर्म चाइल्ड राइट्स इन्फॉर्मेशन (Child Rights Information) है।

  1. यूएनसीआरसी (UNCRC) क्या है?

    • यूएनसीआरसी (UNCRC) का पूरा नाम United Nations Convention on the Rights of the Child है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1989 में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन का प्रावधान करती है। इसके तहत सभी सदस्य देशों को बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और भागीदारी के अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक है।
  2. बाल अधिकारों के संवर्धन करने में यूनिसेफ की भूमिका क्या है?

    • यूनिसेफ (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र बाल निधि, बाल अधिकारों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है:
      • बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा के लिए कार्यक्रम चलाना।
      • बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नीतिगत सुधार की वकालत करना।
      • आपातकालीन स्थितियों में बच्चों को राहत और सहायता प्रदान करना।
      • बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की निगरानी और रिपोर्टिंग करना।
  3. एनसीपीसीआर (NCPCR) के कार्य लिखिए।

    • एनसीपीसीआर (NCPCR) का पूरा नाम National Commission for Protection of Child Rights है। इसके प्रमुख कार्य हैं:
      • बच्चों के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम बनाना।
      • बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जांच करना और सुधारात्मक कार्रवाई की सिफारिश करना।
      • बच्चों के लिए सुरक्षा और कल्याण से संबंधित सरकारी योजनाओं की निगरानी करना।
      • बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना।
      • बाल सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर अनुसंधान और डेटा संग्रह करना।
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UNIT - 3
  1. बाल संरक्षण में जोखिम क्या है इसे स्पष्ट करें।

    • बाल संरक्षण में जोखिम उन कारकों को दर्शाता है जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसमें शारीरिक हिंसा, यौन शोषण, भावनात्मक दुर्व्यवहार, उपेक्षा, बाल श्रम, और तस्करी जैसे खतरे शामिल होते हैं। OR
    • जोखिम क्या है : बच्चों के संरक्षण पाने के अधिकार का उल्लंघन मानव अधिकारों का हनन तो करता ही है बाल जीवन रक्षा और विकास में इतनी बड़ी बाधा भी है जिसे बहुत कम करके आता जाता है और सत्य से कम बताया जाता है इंसान शोषण दुरुपयोग और उपेक्षा के शिकार बच्चों के लिए मौजूद कुछ जोखिम इस प्रकार हैं।
      1    अल्प आयु
      2    शारीरिकऔर मानसिक अस्वस्थता
      3    शैक्षणिक समस्याएं
      4    बेघर होना आवारगी और विस्थापन
  2. बाल यौन शोषण और यौन दुर्व्यवहार में अंतर स्पष्ट करें।

    • बाल यौन शोषण: यह तब होता है जब कोई व्यक्ति बच्चे के साथ यौन गतिविधियों में शामिल होता है, चाहे बलपूर्वक, धमकी देकर या किसी अन्य प्रकार के दबाव से।
    • यौन दुर्व्यवहार: यह व्यापक रूप से यौन उत्पीड़न को शामिल करता है, जिसमें अश्लील हरकतें, अश्लील टिप्पणियां, और अश्लील सामग्री दिखाना शामिल है। यौन दुर्व्यवहार में शारीरिक संपर्क की आवश्यकता नहीं होती। OR
    • 5. बाल यौन शोषण में बाल वेश्यावृत्ति अवैध बाल व्यापार बाल अश्लीलता साइबर अश्लीलता आता है।
      6. बाल यौन दुर्व्यवहार दुरुपयोग घर संस्थान सामुदायिक स्थान पर परिचित रिश्तेदार या परिचित के द्वारा किया गया यौन शोषण है।
  3. बालकों की अवैध खरीद-फरोख्त किस लिए की जाती है?

    • बालकों की अवैध खरीद-फरोख्त कई उद्देश्यों के लिए की जाती है, जिनमें प्रमुख हैं:
      • बाल श्रम के लिए।
      • वेश्यावृत्ति और यौन शोषण के लिए।
      • अवैध अंग प्रत्यारोपण के लिए।
      • घरेलू नौकर के रूप में काम करवाने के लिए।
बच्चों की अवैध खरीद.फरोख्त विभिन्न उद्देश्यों को लेकर की जाती है जिन्हें में श्रम बंधुआ मजदूर भीख मांगना व्यापार मानवों की बिक्री शादी तथा अन्य कारण है यह कार्य एक व्यापक नेटवर्क के जरिए होता है। बच्चों की अवैध खरीद.फरोख्त या व्यापार मानव तस्करी का ही एक रूप है जिसे बच्चों के अवैध रूप से आवागमन ओं के उद्देश्य से भर्ती निर्वासन स्थानांतरण आश्रय प्राप्ति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है

बच्चों का अवैध व्यापार वह होता है जिसके अंतर्गत एक स्थान से दूसरे स्थान पर डरा धमकाकर बलपूर्वक बहला.फुसलाकर मजा ले जाना तथा भुगतान करके या अन्य लालच देकर उत्पीड़न करना इत्यादि शामिल है।

1.बाल अवैध व्यापार के दुष्प्रभाव।
2.बच्चों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है।
3.किशोरियों गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।
4.लड़के लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया जाता है।
5.बच्चों की अश्लील सामग्री में इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है।
6.बच्चों का यौन उत्पीड़न।
1.बाल अवैध व्यापार के दुष्प्रभाव।
2.बच्चों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है।
3.किशोरियों गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।
4.लड़के लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया जाता है।
5.बच्चों की अश्लील सामग्री में इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है।
6.बच्चों का यौन उत्पीड़न।

बाल संरक्षण समिति का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत किया जाता है?

  • बाल संरक्षण समिति का गठन जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत किया जाता है।
  1. बाल संरक्षण समिति के प्रमुख कार्य बताएं।

    • बाल संरक्षण समिति के प्रमुख कार्य हैं:
      • बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना।
      • संकट में पड़े बच्चों की पहचान करना और उनकी मदद करना।
      • बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जांच और सिफारिशें करना।
      • बच्चों के लिए सुरक्षित पुनर्वास योजनाएँ बनाना।
      • समुदाय में बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।
  2. बाल संरक्षण संबंधी प्रमुख तीन नीतियां बताएं।

    • बाल संरक्षण संबंधी प्रमुख तीन नीतियां हैं:
      • राष्ट्रीय बाल नीति: बच्चों के अधिकारों और कल्याण के लिए समर्पित नीति।
      • बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986: बाल श्रम के उन्मूलन और नियमन के लिए कानून।
      • पॉक्सो अधिनियम, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012): बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून।
  3. एचआईवी/ऐड्स प्रभावित बच्चों के अधिकार संरक्षण हेतु कौन सा कानून है?

    • एचआईवी/ऐड्स प्रभावित बच्चों के अधिकार संरक्षण हेतु एचआईवी/ऐड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 (HIV/AIDS (Prevention and Control) Act, 2017) लागू किया गया है।

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UNIT - 4
  1. पॉक्सो अधिनियम का पूरा नाम क्या है?

    • पॉक्सो अधिनियम का पूरा नाम प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) है।
  2. किशोर न्याय अधिनियम कितने प्रकार के बच्चों के लिए है?

    • किशोर न्याय अधिनियम दो प्रकार के बच्चों के लिए है:
      • संघर्षशील बच्चे (Children in Conflict with Law)
      • संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे (Children in Need of Care and Protection)
  3. बाल श्रम कानून में बच्चे की उम्र कितनी रखी गई है?

    • बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार, बच्चे की उम्र 14 वर्ष से कम है। 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं में कार्य करने से मना किया गया है।
  4. मेंटल हेल्थकेयर एक्ट कब बना?

    • मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 (Mental Healthcare Act, 2017) बना।

5. HIV/AIDS बिल 2009 में किन बच्चों का प्रावधान है?

  • HIV/AIDS बिल 2009 (अब HIV/AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के रूप में लागू) में **एचआईवी/एड्स से प्रभावित और संक्रमित बच्चों** के अधिकारों और संरक्षण का प्रावधान है। इसका उद्देश्य एचआईवी/एड्स से प्रभावित बच्चों को भेदभाव से बचाना और उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक सुरक्षा सेवाओं का अधिकार सुनिश्चित करना है।


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UNIT - 5
  1. सहायक सेवाएँ क्या होती हैं?

    • सहायक सेवाएँ वे सेवाएँ होती हैं जो मुख्य सेवाओं को सहायता और समर्थन प्रदान करती हैं। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी सहायता, पुनर्वास, और सामाजिक सुरक्षा जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं, जो बच्चों और परिवारों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार मदद करती हैं।
  2. बीएलसीपीसी (BLCP) क्या है?

    • बीएलसीपीसी (BLCP) का पूरा नाम Block Level Child Protection Committee है। यह एक समिति होती है जो ब्लॉक स्तर पर बच्चों के संरक्षण और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करती है।
  3. जेजेबी (JJB) का पूरा नाम बताईए।

    • जेजेबी (JJB) का पूरा नाम Juvenile Justice Board है। यह बोर्ड किशोर न्याय अधिनियम के तहत गठित किया जाता है और किशोर अपराधियों के मामलों की सुनवाई करता है।
  4. आरएससीपीएस (RSCPCR) के कार्य बताइए।

    • सहायक सेवाएँ क्या होती हैं?

      • सहायक सेवाएँ वे सेवाएँ होती हैं जो मुख्य सेवाओं को सहायता और समर्थन प्रदान करती हैं। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी सहायता, पुनर्वास, और सामाजिक सुरक्षा जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं, जो बच्चों और परिवारों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार मदद करती हैं।
    • बीएलसीपीसी (BLCP) क्या है?

      • बीएलसीपीसी (BLCP) का पूरा नाम Block Level Child Protection Committee है। यह एक समिति होती है जो ब्लॉक स्तर पर बच्चों के संरक्षण और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करती है।
    • जेजेबी (JJB) का पूरा नाम बताईए।

      • जेजेबी (JJB) का पूरा नाम Juvenile Justice Board है। यह बोर्ड किशोर न्याय अधिनियम के तहत गठित किया जाता है और किशोर अपराधियों के मामलों की सुनवाई करता है।
    • आरएससीपीएस (RSCPC) के कार्य बताइए।

      • RSCPC का पूरा नाम Rajasthan State Child Protection Committee है। यह राजस्थान राज्य में बाल संरक्षण के लिए कार्यरत एक समिति है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
          1. बाल संरक्षण नीतियों का कार्यान्वयन: राज्य में बाल संरक्षण से संबंधित नीतियों और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।

          2. बाल अधिकारों की रक्षा: बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके हितों की सुरक्षा करना।

          3. समाज में जागरूकता फैलाना: बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान और कार्यक्रम आयोजित करना।

          4. बाल शोषण और उपेक्षा की निगरानी: बाल शोषण और उपेक्षा के मामलों की निगरानी करना और उचित कार्रवाई करना।

          5. समन्वय और सहयोग: सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संबंधित इकाइयों के साथ समन्वय और सहयोग स्थापित करना।

          6. पुनर्वास और पुनर्स्थापन: संकट में पड़े बच्चों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए उपाय करना।

    • सीडब्ल्यूसी (CWC) के उद्देश्य बताइए।

      • सीडब्ल्यूसी (CWC) का पूरा नाम Child Welfare Committee है। इसके उद्देश्य हैं:
        • बच्चों के कल्याण और संरक्षण को सुनिश्चित करना।
        • बच्चों के लिए सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास योजनाएँ बनाना।
        • बच्चों के अधिकारों और उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना।
        • संकट में पड़े बच्चों की पहचान और देखभाल करना।
    • बाल सुरक्षा का अर्थ क्या है?

      • बाल सुरक्षा का अर्थ है बच्चों को किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण, दुरुपयोग, और उपेक्षा से बचाना। इसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है, जहाँ वे अपने अधिकारों का आनंद ले सकें और उनका समुचित विकास हो सके।
  5. सीडब्ल्यूसी (CWC) के उद्देश्य बताइए।

    • सीडब्ल्यूसी (CWC) का पूरा नाम Child Welfare Committee है। इसके उद्देश्य हैं:
      • बच्चों के कल्याण और संरक्षण को सुनिश्चित करना।
      • बच्चों के लिए सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास योजनाएँ बनाना।
      • बच्चों के अधिकारों और उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना।
      • संकट में पड़े बच्चों की पहचान और देखभाल करना।
  6. बाल सुरक्षा का अर्थ क्या है?

    • बाल सुरक्षा का अर्थ है बच्चों को किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण, दुरुपयोग, और उपेक्षा से बचाना। इसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है, जहाँ वे अपने अधिकारों का आनंद ले सकें और उनका समुचित विकास हो सके।

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