इकाई प्रथम
सामाजिक शोध - अर्थ, खोज एवं अनुसंधान
1. शोध मे वस्तुनिष्ठता क्या है?
शोध में वस्तुनिष्ठता एक महत्वपूर्ण गुण है जो विशेषज्ञता, नैतिकता और विज्ञानिक मानकों का पालन करता है। यह शोधकर्ताओं को सत्यापन, प्रामाणिकता और नवीनता के मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। वस्तुनिष्ठता शोधकर्ता को उच्चतम मानकों के साथ विज्ञानिक रूप से कार्य करने और नई ज्ञान या सृजनात्मक योगदान प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
2. सामान्यीकरण से कया आशय है?
सामान्यीकरण से आशय एक प्रक्रिया होती है जिसमें विभिन्न विषयों, आदर्शों, या ज्ञान के मध्य एक सामान्य अंतर या मिलान की प्राथमिकता होती है। यह विभिन्न तत्वों को एकीकृत करने और संगठित करने का प्रयास होता है। सामान्यीकरण के माध्यम से, अधिकांश विविधताओं या असंगतताओं को एकीकृत किया जा सकता है और एक सामान्य अवधारणा, नियम, या मानक का निर्माण किया जा सकता है।
3. सर्वेक्षण शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई है?
"सर्वेक्षण" शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द "survey" से हुई है, जिसका अर्थ होता है "देखना" या "समीक्षा करना"। सर्वेक्षण एक विज्ञान्य प्रक्रिया है जिसमें सूचना या डेटा को संकलित, विश्लेषित और व्याख्यात किया जाता है। सर्वेक्षण का उद्देश्य विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देना, जानकारी की आवश्यकताओं को पूरा करना, और समाज या विज्ञान में नए पहलुओं को खोजना हो सकता है।
4. विज्ञान और सामान्य ज्ञान में क्या अंतर हैं?
विज्ञान और सामान्य ज्ञान दोनों मानव ज्ञान के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, लेकिन उनमें अंतर है। विज्ञान विशेषज्ञता को दर्शाता है जो प्रमाणित, प्रामाणिक और प्रकृति के नियमों और सिद्धांतों के अध्ययन में लगी होती है। इसके खिलाफ, सामान्य ज्ञान व्यावहारिक और आम ज्ञान का संग्रह है जो हमें रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी हो सकता है, जैसे इतिहास, साहित्य, कला, राजनीति, और सामान्य जीवन के मुद्दे।
5. कार्य-कारण सम्बन्ध से क्या आशय है?
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इकाई द्वितीय
सामाजिक शोध में चरणों का क्रम
1. गुणात्मक पद्धतियों के प्रकार लिखिए।
गुणात्मक पद्धतियाँ निम्नलिखित हो सकती हैं:
- विवरणात्मक पद्धति: इस पद्धति में, गठित जानकारी को विवरणों और विस्तार से प्रस्तुत किया जाता है। यह विधियों, सांख्यिकी और तालिकाओं का उपयोग करती है।
- वर्गीकरणात्मक पद्धति: इस पद्धति में, जानकारी को समूहों या श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। वर्गीकरण, विशेषताओं और सामान्यताओं के आधार पर हो सकता है।
- अनुक्रमात्मक पद्धति: इस पद्धति में, जानकारी को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाता है। इसमें दिए गए क्रम का उपयोग करके जानकारी को संगठित किया जाता है।
2. मात्रात्मक पद्धतियों के प्रकार लिखिए।
मात्रात्मक पद्धतियाँ निम्नलिखित हो सकती हैं:
- व्यक्तिगत मापन: इस पद्धति में, जानकारी को अलग-अलग व्यक्तियों के माध्यम से मापा जाता है। इसमें सर्वेक्षण, साक्षात्कार और अनुभवों का उपयोग किया जा सकता है।
- समान्यीकरण: इस पद्धति में, जानकारी को सामान्यीकृत करके प्रस्तुत किया जाता है। इसमें सांख्यिकी, प्रारूपी तकनीक और विधियों का उपयोग किया जा सकता है।
3. मिश्रित पद्धति के दो उदाहरण दीजिए।
मिश्रित पद्धति उदाहरण:
- व्याख्यात्मक पद्धति: इस पद्धति में, जानकारी को विवरणात्मक और मात्रात्मक दोनों तरीकों से प्रस्तुत किया जाता है। यह जानकारी को समर्पित प्रक्रिया के माध्यम से संयोजित करता है।
- तुलनात्मक पद्धति: इस पद्धति में, विभिन्न स्रोतों से जानकारी को तुलना की जाती है। यह तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से विभिन्न परिणामों को निर्धारित करने में मदद करता है।
4. प्रयोगात्मक शोध पद्धति की दो विशेषताएं लिखिए।
प्रयोगात्मक शोध पद्धति की विशेषताएं:
- प्रयोगात्मक अभिगम: प्रयोगात्मक शोध पद्धति में, विज्ञान के साथ साथ अनुभवों और प्रयोग के माध्यम से नई ज्ञान की प्राप्ति होती है।
- समस्या-समाधान केंद्रितता: प्रयोगात्मक शोध पद्धति में, समस्या के समाधान के लिए विशिष्ट उपायों को आविष्कार करने का प्रयास किया जाता है। इसमें नवीनतम तकनीक, उपकरण और प्रयोगों का उपयोग किया जाता है।
5. समस्या चयन की दो सावधानियां लिखिए।
समस्या चयन की दो सावधानियाँ:
- सामग्री का विचारपूर्वक चयन करें: समस्या का चयन करते समय, सामग्री की विचारपूर्वक जांच करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करेगा कि चुनी गई समस्या संशोधन के लिए उचित है और उसका अध्ययन करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।
- समस्या की प्राथमिकता का निर्धारण करें: समस्या की प्राथमिकता को निर्धारित करना आवश्यक है, जिससे आवश्यकता के आधार पर संसाधनों का उपयोग किया जा सके। इससे समस्या के समाधान के लिए संग्रहीत समय, शोध का दृष्टिकोण, और अनुमानित परिणामों के आधार पर निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
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इकाई तृतीय
शोध प्रारूप - अवधारणा, परिभाषा एवं उद्देश्य
1. दैवनिदर्शन क्या है?
दैवनिदर्शन धार्मिक एवं तत्वाधारित दृष्टिकोण है, जिसमें मान्यताओं, मूल्यों और दिव्यताओं के आधार पर ईश्वर, आत्मा, जीवन के उद्देश्य और आध्यात्मिकता को समझने का प्रयास किया जाता है। यह एक व्यक्ति या समुदाय के अद्यतन आदर्शों, मार्गदर्शन और साधनों का अध्ययन करता है ताकि उन्हें सुख, सामर्थ्य, और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त करने में मदद मिल सके।
2. साक्षात्कार के दो प्रकार लिखिए।
साक्षात्कार के दो प्रकार:
- आवेगमान साक्षात्कार: इसमें, साक्षात्कारअभ्यास करने वाले व्यक्ति को विशिष्ट आवेगमान, उत्तेजना या उत्साह की स्थिति में रखा जाता है, जिसके कारण साक्षात्कार कराने वाले उसे विभिन्न प्रश्न पूछते हैं और व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और व्यवहार में संक्रमण को देखते हैं।
- संरचित साक्षात्कार: इसमें, साक्षात्कार कराने वाले व्यक्ति किसी निर्दिष्ट ढांचे या प्रणाली के अनुसार सवाल पूछते हैं और उत्तर प्राप्त करते हैं। यह सामान्यतः उपयोगकर्ता की जीवनी, अनुभव, व्यक्तित्व, शिक्षा आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए उपयोगी होता है।
3. शोध प्रारूप के महत्व को लिखिए।
शोध प्रारूप के महत्व:
शोध प्रारूप एक महत्वपूर्ण कारक होता है जो शोध की संरचना और व्यवस्था को स्पष्ट करता है। इसके महत्वपूर्ण तत्वों में शोध का उद्देश्य, समस्या बयान करना, प्रश्न निरूपण, सामग्री का विवरण, विधियों और तकनीकियों का उपयोग, और परिणामों का विश्लेषण शामिल होते हैं। यह शोधकर्ता को अपने शोध को निरंतरता, संगठितता और वैधता के साथ प्रस्तुत करने में मदद करता है।
4. गुच्छक निदर्शन के दो उदाहरण दीजिए।
गुच्छक निदर्शन के दो उदाहरण:
- अनुसंधान गुच्छक: यह उपकरण वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रयोग किया जाता है जहां वैज्ञानिक एक संग्रहित सूची में अद्यतित संसाधनों, अध्ययनों, प्रयोगशालाओं, आवश्यक सामग्री, और अन्य संबंधित जानकारी को संग्रहीत करता है।
- पुस्तकालय गुच्छक: यह पुस्तकालय में पुस्तकों और सामग्री के संग्रहीत और संग्रहीत करने के लिए उपयोग होता है। यह संग्रहण और प्रबंधन को सुगम और सुव्यवस्थित बनाने में मदद करता है ताकि पाठकों को आवश्यक संसाधनों और जानकारी की सुविधा मिल सके।
5. निदर्शन त्रुटि क्या हैै?
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इकाई चतुर्थ
तथ्यों का स्वरूप एवं प्रकार
1. तथ्य किस कहते है?
तथ्य वास्तविकता या सत्यता पर आधारित जानकारी को कहते हैं। ये विद्यमान दिखाई देने वाली बातें, पूर्ण और सत्य होती हैं और आवश्यकता अनुसार सत्यापित की जा सकती हैं। तथ्य वैज्ञानिक अध्ययन, अनुसंधान, प्रयोग, सर्वेक्षण, और अन्य स्रोतों के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं।
2. गुणात्मक मापन क्या है?
गुणात्मक मापन उपयोगी गुणों, गुणधर्मों या विशेषताओं को मापने की प्रक्रिया है। इसमें मापन उपकरण, तकनीक और मापन प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है जिससे गुणात्मक मापन होता है। इससे उपयोगकर्ता को गुणों की मान्यता, तुलना, और विश्लेषण करने में मदद मिलती है। उदाहरण के रूप में, वजन का मापन, लंबाई का मापन, तापमान का मापन आदि गुणात्मक मापन के उदाहरण हैं।
3. संख्यात्मक मापन क्या है?
संख्यात्मक मापन वास्तविक या मानक संख्याओं का उपयोग करके मापन करने की प्रक्रिया है। यह मापन की प्रक्रिया में संख्याओं का उपयोग करके मापन के मान को प्रदर्शित करता है। संख्यात्मक मापन कई विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग होता है, जैसे कि वैज्ञानिक अनुसंधान, गणित, भौतिकी, रसायनशास्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, आदि।
4. प्राथमिक समंक सकंलन के दो उपकरण लिखिए।
प्राथमिक समंक सकलन के दो उपकरण:
- कोष्ठक (एबाकस)
- जांचक (दराज)
5. जनगणना रिपोर्ट किस प्रकार स्रोत है?
जनगणना रिपोर्ट किस प्रकार का स्रोत होती है:
जनगणना रिपोर्ट एक सार्वजनिक दस्तावेज़ होती है जो एक देश या क्षेत्र के लोगों के बारे में विभिन्न आंकड़ों और जानकारियों को समेटती है। इस रिपोर्ट में जनसंख्या, लिंग अनुपात, आबादी का वितरण, जाति, धर्म, शिक्षा, आय, औसत जीवनकाल, रोजगार, आदि जैसी जानकारी होती है। यह जनसंख्या और सामाजिक आंकड़ों को निर्धारित करने, सरकारी योजनाओं की योजना और नीतियों का निर्माण करने और उन्हें समारोहों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में उपयोग करने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है।
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इकाई पंचम
सामाजिक शोध एवं सांख्यिकी - महत्व एवं सीमायें
स्पष्टता और सुव्यवस्थितता: प्रतिवेदन में उचित ढंग से संगठित और प्रस्तुत किए गए आंकड़ों और जानकारियों की स्पष्टता और सुव्यवस्थितता होनी चाहिए। सही शीर्षक, सारांश, खंड, और सूचनाएं उपयुक्त ढंग से प्रदर्शित होनी चाहिए।
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