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सामाजिक सामूहिक कार्य : अति लघु उत्तरीय / वस्तुनिष्ठ प्रश्न

इकाई प्रथम

परिचय मूल्य एवं सिद्धांत

   1. समूह कार्य की परिभाषा दें।

समूहकार्य एक व्यवस्थित एवं सक्रिय शिक्षण विधा है जो छात्रों के छोटे समूहों को मिलकर एक आम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। ये छोटे समूह नियोजित गतिविधियों के माध्यम से अधिक सक्रिय और अधिक प्रभावी सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं।

अथवा

क्वायल ग्रेस (1939) सामाजिक समूहिक कार्य का उद्देश्य समूह की स्थितियों में व्यक्तियों की अंतःक्रियाओं द्वारा व्यक्तियों का विकास करना तथा ऐसी सामूहिक स्थितियों को उत्पन्न करना जिससे समान उद्देश्यों के लिए एकीकृत,सहयोगी सामूहिक क्रिया हो सके। 

विल्सन एंड ड्राईलैंड (1949) सामाजिक समूह कार्य एक मनो सामाजिक प्रक्रिया हैं, जो नेतृत्व की योग्यता और सहकारिता के विकास से उतनी ही संबंधित हैं, जितनी सामाजिक उद्देश्य के लिए सामूहिक अभिरुचियों के निर्माण से हैं।


    2. समूह कार्य में मूल्य को लिखें।

मूल्य समाज द्वारा मान्यता प्राप्त इच्छाएँ एवं लक्ष्य हैं जिनका आन्तरीकरण समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से होता है।

विभिन्न विद्वानों सामाजिक विचारकों , विशेषज्ञों, शिक्षाविदों के विचारों से अवगत होने के पश्चाोत समूह कार्य के मूल्यों को निम्नानुसार बताया जा सकता है-

  1. आत्म निर्णय का अधिकार 
  2. समूह सदस्यों की योग्यता एवं महत्ता पर विश्वास 
  3. आत्म पूर्णता
  4. विकास का मुख्य आधार संबंध
  5. व्यक्तित्व अन्तरों की मान्यता एवं संस्कृति
  6. परिवर्तन का विरोध
  7. विकास के समान अवसर 


    3. परानुभूति क्या है?

परानुभूति उस स्थिति को इंगित करता है जिसमें एक व्यक्ति-दूसरे व्यक्ति की स्थिति को अपने अन्दर अनुभव करता है और उसकी के आधार पर समाधान प्रस्तुत करता है।


    4. सामूहिक कार्य के उद्देश्य को लिखें।

सामूहिक कार्य का उद्देश्य समूह द्वारा व्यक्तियों में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता एवं आत्म निर्देशन का विकास करना हैं। 

क्वाइल  ने सामूहिक कार्य के निम्न उद्देश्य बताए हैंः

1. व्यक्तियों की आवश्यकताओ और क्षमताओं के अनुसार विकास के अवसर प्रदान करना।

2. व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों, समूह और समुदाय से समायोजन प्राप्त करने में सहायता देना।  

3. समाज के विकास हेतु व्यक्तियों को प्रेरित करना।  

4. व्यक्तियों को अपने अधिकारों, सीमा और योग्यताओं के साथ-साथ अन्य व्यक्तियों के अधिकारों, योग्यताओं एवं अंतरो को पहचाने में सहायता देना।


    5. सामूहिक कार्य की विशेषताएँ लिखें।

सामूहिक कार्य के माध्यम से इन विशेषताओं और क्षमताओं का विकास होता है, सामूहिक जीवन में भाग लेना, अपनेपन की भावना का अनुभव करना, अन्य लोगों के साथ बातचीत स्थापित करना, मतभेदों को सुलझाना इत्यादि|

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इकाई-2

समूह गत्यात्मकता

   1. व्यक्तिगत एवं सामूहिक निर्णय को स्पष्ट करें।

ऐसे निर्णय जो केवल एक व्यक्ति द्वारा लिये जाते हैं व्यक्तिगत निर्णय कहलाते हैं। एकल स्वामित्व व्यवसाय में लिये जाने वाले निर्णय व्यक्तिगत निर्णय कहलाते हैं। 


   2. समूह निर्णय को स्पष्ट करें।

ऐसे निर्णय जो एक समूह द्वारा जैसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समूह, द्वारा लिये जाते हैं, सामूहिक निर्णय कहलाते हैं। 


   3. समूह की विशेषताएँ स्पष्ट करें।

सामाजिक समूह की निम्नलिखित विशेषताएं हैं--

  1. समान्य हित:  (सामान्य हित होने से समूह का स्थायित्व बढ़ता हैं)
  2. सदस्यों की पारस्परिक जागरूकता :  (पारस्परिक जागरूकता से सामाजिक सम्बन्ध विकसित होते हैं।)
  3. अनिश्चित आकार :  (समूह का कोई आता नहीं होता वह छोटा या बड़ा भी हो सकता है)
  4. मनुष्यों का संग्रह : 
  5. सामाजिक संबंध:  (यह चेतना सामाजिक सम्बन्धों के निर्माण और विकास मे सहायक होती है।)
  6. एकता की भावना: ( इस एकता का आधार चेतना होती हैं। यह चेतना दो प्रकार की होती हैं-- 1. चेतन एकता, 2. अचेतन एकता।)
  7. सदस्यों का पारस्परिक आदान-प्रदान (एक ही समूह के सदस्यों ने विचारों एवं वस्तुओं का आदान प्रदान एक दूसरे को समझने में सहायक होता है जो निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है)
  8. ऐच्छिक सदस्यता :  (व्यक्ति अपनी रूचि, इच्छा और योग्यता के आधार पर किसी समूह की सदस्यता को ग्रहण कर सकता है )
  9. नियंत्रण की व्यवस्था : प्रत्येक समूह सदस्यों के व्यवहारों को नियंत्रित करने के लिये औपचारिक या अनौपचारिक नियंत्रण के साधनों को अपनाता हैं।)
  10. कार्य विभाजन  (प्रत्येक समूह सदस्यों के व्यवहारों को नियंत्रित करने के लिये औपचारिक या अनौपचारिक नियंत्रण के साधनों को अपनाता हैं।)
  11. एक निश्चित आधार:  (प्रत्येक समूह मे निर्माण के मूल मे कुछ निश्चित आधार होते है। उदाहरण के लिए ये आधार हैं--- रक्त सम्बन्ध, शारीरिक तथा मानसिक समानताएं, आवश्यकताएं, संख्या आदि।)


   4. समूह कार्य में नियोजन को स्पष्ट करें।

समूह का निर्माण हमेशा ही सुनियोजित होना चाहिए सामुहिक कार्यकर्ता सुनियोजित तरीके से समूह निर्माण का कार्य करते है यदि सामूहिक कार्यकर्ता नियोजित तरीके से कार्य करेगा तो निश्चित ही उसे लक्ष्य प्राप्त हो जायेगा। लक्ष्य नियोजन का सिद्धांत लक्ष्य प्राप्ति में अत्यंत ही सहायक होता है। 

   5. समूह कार्य में कार्य निष्पादन करें।

 पीटर एफ. ड्रकर के शब्दों में, ‘‘एक प्रबन्धक जो भी क्रिया करता है, वह निर्णय पर आधारित होती है। उसे निर्णय लेकर ही अपने कर्तव्यों का निष्पादन करना पड़ता है। कब व्यवसाय प्रारम्भ करें? कितने लोगों को काम पर लगायें? किस वस्तु का उत्पादन करें? कच्चा माल कहाँ से क्रय करें? निर्मित माल की बिक्री कहाँ करें? आदि निर्णयन ही तो है।

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इकाई तृतीय

समूह  संरचना: उद्देश्यों का निर्माण एवं कार्यक्रम नियोजन, आंकलन, क्रियान्वयन का चरण, समापन का चरण, मूल्यांकन

    1.    समूह की अवधारणा स्पष्ट करें।

जेम्स ड्रेवर– व्यक्तियों का संग्रह जो किसी एकता के आधार पर एकत्रित होते हैं, समूह कहलाते हैं।


मैकाइवर– समूह से तात्पर्य व्यक्तियों के किसी ऐसे संग्रह से है जो एक–दूसरे के साथ सामाजिक संबंधों में आ जाते हैं।


    2.    सामूहिक संरचना को स्पष्ट करें।

एक सामूहिक एक ऐसा संगठन है जिसे पदानुक्रम के बिना प्रबंधित किया जाता है | सामाजिक संरचना के उदाहरणों में परिवार , धर्म , कानून , अर्थव्यवस्था और वर्ग शामिल हैं । 

                                                अथवा

सामाजिक संरचना ऐक ढाँचा है जिस पर एक समाज स्थापित होता है। यह समाज के विभिन्न संस्थानों के बीच संबंधों के मानदंडों और प्रतिमानों को निर्धारित करता है।


    3.    समूह के उद्देश्यों को स्पष्ट करें।

" सन् 1937 मे ग्रेस क्वायल ने लिखा कि " सामाजिक सामूहिक कार्य का उद्देश्य सामूहिक स्थितियों में व्यक्तियों की पारस्परिक क्रिया द्वारा व्यक्तियों का विकास करना तथा ऐसी सामूहिक स्थितियों को उत्पन्न करना जिससे समान उद्देश्यों के लिए एकीकृत, सहयोगिक, सामूहिक क्रिया हो सकें ।"

    4.    स्केप फोल्डिंग का अर्थ स्पष्ट करें।

 स्कैफल्डिंग एक प्रकार की शिक्षण प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों को दिये जाने वाले निर्देश की मात्रा तथा स्वरूप उनके विकास के स्तर के अनुरूप होता है।

    5.    समूह नेतृत्व क्या है? स्पष्ट करें।

समूह कार्य में नेतृत्व, वह क्षमता है जो समूह के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए व्यक्तियों के समूह को प्रेरित करती है | एक समूह को प्रेरित करने की क्षमता औपचारिक और अनौपचारिक दोनों शक्तियों से आती है |

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इकाई चतुर्थ


समूह कार्य में कार्यक्रम नियोजन: अर्थ, महत्व, नियोजन एवं विकास प्रक्रिया समूह कार्य में कार्यक्रम नियोजन  - 


    1.    समूह कार्य में श्रेणीकरण

समाजशास्त्रियों ने भिन्न-भिन्न आधारों पर सामाजिक समूह के अनेक प्रकारों का उल्लेख किया हैं। उदाहरण के लिए, समूह द्वारा किए जाने वाले कार्यों के आधार पर इन्हें सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सेवा-समूह आदि में वर्गीकृत किया जा सकता हैं। 


    2.    समूह कार्य में निदान

समूह निदान का तात्पर्य समूह की आवश्यकता एवं समस्याओं की प्रकृति के विशेषण तथा परिभाषा से हैं जो कि एक व्यावसायिक कार्यकर्ता द्वारा संपन्न किया जाता है | 


    3.    समूह कार्य में उपचार

समाज कार्य में एक उपचार समूह ग्राहकों का एक चिकित्सीय समूह है, जिन्हें इन मुद्दों को हल करने के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ मिलकर काम करने में समान समस्याएं होती हैं।


    4.    निदान के प्रकारों को लिखें।

पर्लमैन के मत में निदान के तीन प्रकार हैं :-

  1. गतिशील निदान ( Dynamic Diagnosis)

  2. क्लीनिकल निदान ( Clinical Diagnosis)

  3. कारणात्मक निदान ( Etiological Diagnosis)


    5.    बाल सुधार गृह में समूह कार्य

समूह कार्य छात्रों को प्रक्रिया कौशल में संलग्न होने का अवसर देता है जो जानकारी को संसाधित करने और समस्याओं का मूल्यांकन और समाधान करने के साथ-साथ समूहों के भीतर भूमिकाओं के उपयोग के माध्यम से प्रबंधन कौशल और उनके समूह के अंतिम उत्तर के बारे में निर्णय लेने के लिए विकल्पों का आकलन करने में शामिल मूल्यांकन कौशल में संलग्न होने का अवसर देता है। .


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इकाई पंचम


समूह कार्य में अभिलेख लेखन: उद्देश्य, प्रकार, सिद्धांत एवं महत्व 


    1.    अभिलेखन के प्रकारों को लिखें।


अभिलेखन के दो महत्वपूर्ण प्रकार हैंः-

1. वर्णनात्मक प्रकार:- यह सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। इसमें तथ्यों एवं कार्यों को विस्तार से लिखा जाता है तथा प्रत्येक घटना व स्थिति का स्पष्ट चित्रण किया जाता हैं। घटना का क्रमानुसार चित्रण होता है। 

2. संक्षिप्त अभिलेख- इस प्रकार के अभिलेखों में सामाजिक अध्ययन व सामाजिक अतिवृत्ति  को कई अंशो में विभक्त कर देते हैं। विषय के आधार पर संपूर्ण प्रक्रिया को कई भागों में विभाजित कर दिया जाता है, जैसे-अभिज्ञान आंकड़े, भागीकरण, अंतःक्रियाएं, समस्याएं इत्यादि। 


    2.    समूह कार्य में मूल्यांकन की परिभाषा दें।

ट्रैकर एच.बी. (1955) ‘‘सामाजिक समूहिक कार्य में मूल्यांकन वह भाग है जिसमें कार्यकर्ता संस्था के उद्देश्यों एवं कार्यों से संबंधित समूह अनुभव के गुणों को नापने का प्रयत्न करता हैं।‘‘


    3.    अच्छे अभिलेखन की विशेषताओं को लिखें।

 संचित अभिलेख की विशेषताएँ संचित अभिलेख की विशेषताएँ निम्न हैं—

PAGEE 129-130


    4.    पर्यवेक्षण की परिभाषा दें।

पर्यवेक्षण दो शब्दों— परि + अवेक्षण का समन्वय है। इसका अर्थ है- दूसरों के कार्यों का अधिदर्शन या अवलोकन करना। अतः पर्यवेक्षण एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा दूसरों के कार्यों का अवलोकन करके उन्हें उचित निर्देशन भी प्रदान करना है। 


    5.    समूह कार्य में सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका लिखें।

सामाजिक कार्यकर्ता समूह  के व्यक्ति के साथ अवलोकनकर्ता और मार्गदर्शक रूप में कार्य करता है वह सभी गतिविधियों को अवलोकन करता है जिससे व्यक्ति/समूह के विकास के स्तर का पता चलता है जिससे, वह इस तथ्य पर पहुंच सकता है की, लक्ष्य प्राप्ति हेतु व्यक्ति व समूह में सकारात्मक व नकारात्मक प्रकिया चल रही है ।




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